समर्पण और आज्ञापालन-गुरु घंटालो का मायाजाल -11

  रहस्यों की दुनिया में आपका स्वागत है।यहाँ  आपको ऐसे ऐसे  रहष्यो के बारे में जानने को मिलेगा जिसको  आप ने  कभी सपने में  भी नहीं सोचा होगा। रहस्य को जीया जा सकता है, लेकिन जाना नहीं जा सकता। यह हमेशा अज्ञात रहता है। यह हमेशा एक रहस्य बना रहता है।

ओशो ने 'एष धम्मो सनंतनो' और अपने अन्य कई प्रवचनों में उन तथाकथित 'गुरुओं' की धज्जियाँ उड़ाई हैं जो शिष्यों को मानसिक गुलाम बनाने के लिए 'समर्पण' और 'आज्ञापालन' का दुरुपयोग करते हैं।

१. समर्पण बनाम मानसिक गुलामी

ओशो कहते हैं कि असली समर्पण (Surrender) 'हृदय' की एक घटना है, यह कोई 'अनुबंध' (Contract) नहीं है।

  • पोल: पाखंडी गुरु समर्पण का उपयोग शिष्य की बुद्धि (Intelligence) को कुचलने के लिए करते हैं। वे चाहते हैं कि आप प्रश्न पूछना बंद कर दें। ओशो के अनुसार, जो गुरु आपके तर्क और संदेह से डरता है, वह स्वयं सत्य को नहीं जानता। असली गुरु आपकी बुद्धि को और प्रखर बनाता है, उसे गुलाम नहीं बनाता।

२. आज्ञापालन: एक मनोवैज्ञानिक शोषण

ये गुरु घंटाल 'आज्ञापालन' (Obedience) को धर्म का आधार बताते हैं ताकि वे शिष्य का शोषण कर सकें—चाहे वह आर्थिक हो, शारीरिक हो या मानसिक।

  • पोल: वे आपको डराते हैं कि "अगर आज्ञा नहीं मानी, तो नरक जाओगे या पतन हो जाएगा।" ओशो कहते हैं कि यह अध्यात्म नहीं, बल्कि मनोवैज्ञानिक आतंकवाद है। बुद्ध ने मरते समय कहा था— 'अप्प दीपो भव' (अपने दीये खुद बनो)। उन्होंने यह नहीं कहा कि "मेरी आज्ञा मानो।"

समर्पण और  आज्ञापालन-गुरु घंटालो  का मायाजाल

३. अहंकार की अदला-बदली

जो गुरु शिष्यों से दंडवत करवाते हैं या अपनी पूजा करवाते हैं, वे दरअसल अपने अहंकार (Ego) की तुष्टि कर रहे होते हैं।

  • पोल: एक तरफ वे आपको 'अहंकार छोड़ने' की शिक्षा देते हैं, और दूसरी तरफ अपना अहंकार बड़ा करने के लिए आपसे गुलामी करवाते हैं। ओशो कहते हैं कि ऐसे लोग गुरु नहीं, बल्कि बीमार हैं जिन्हें भीड़ और सत्ता (Power) की भूख है।

४. आज्ञापालन की आड़ में विवेक की हत्या

गुरु घंटाल कहते हैं, "अपना दिमाग घर छोड़ कर आओ।"

  • पोल: यह सबसे बड़ा धोखा है। ओशो कहते हैं कि विवेक (Discrimination) ही एकमात्र रोशनी है जो आपके पास है। जो गुरु आपकी इस रोशनी को ही बुझा दे, वह आपको केवल अंधकार में ले जाएगा। आज्ञापालन का अर्थ 'गधा' बनना नहीं है। असली शिष्यत्व वह है जहाँ गुरु और शिष्य के बीच 'प्रेम' हो, न कि 'मालिक और दास' का संबंध।

५. गुरु का व्यवसाय (Professional Gurus)

आजकल गुरु होना एक बड़ा व्यापार है। आज्ञापालन इसलिए अनिवार्य बनाया जाता है ताकि संस्था (Organization) चलती रहे।

  • पोल: ये गुरु आपको स्वतंत्र (Independent) करने के बजाय आप पर अपनी निर्भरता (Dependency) बढ़ाते हैं। वे चाहते हैं कि आप हर छोटी बात के लिए उनसे पूछें। असली गुरु वही है जो आपको जल्द से जल्द अपनी जरूरत से मुक्त कर दे।


ओशो का प्रहार:

ओशो ने एक बार बहुत कड़ी बात कही थी—

"संसार में बहुत से लोग गुरु इसलिए बने बैठे हैं क्योंकि वे अपने जीवन में कोई और सत्ता नहीं पा सके। वे तुम्हारे ऊपर शासन करना चाहते हैं। सावधान रहना, जो तुम्हें तुम्हारी स्वतंत्रता से वंचित करे, वह तुम्हारा दुश्मन है, गुरु नहीं।"

असली गुरु की पहचान:

  • वह आपको डराएगा नहीं, बल्कि अभय (Fearless) बनाएगा।

  • वह आपसे आज्ञा नहीं मनवाएगा, बल्कि आपकी समझ (Understanding) को जगाएगा।

  • वह आपको अपनी बैसाखी नहीं देगा, बल्कि आपको अपने पैरों पर खड़ा होना सिखाएगा।

डिसक्लेमर

'इस लेख में दी गई जानकारी/सामग्री/गणना की प्रामाणिकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। सूचना के विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/धार्मिक मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संकलित करके यह सूचना आप तक प्रेषित की गई हैं। हमारा उद्देश्य सिर्फ सूचना पहुंचाना है.सिर्फ काल्पनिक कहानी समझ कर ही पढ़े .

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