नवगुंजरा: भारतीय पौराणिक परंपरा का अद्भुत दिव्य स्वरूप और विराट दर्शन ओड़िशा की सांस्कृतिक पहचान और पौराणिक कथाओं में नवगुंजरा का वर्णन विशेष रूप से महाकवि सारला दास द्वारा रचित 'ओड़िया महाभारत' में मिलता है। यह एक ऐसा दिव्य प्राणी है जो नौ विभिन…
Read moreनेवारी संस्कृति और तांत्रिक परंपरा में श्वेतकाली अजिमा , जिन्हें 'न्यताभुलु अजिमा' भी कहा जाता है, शक्ति का वह अद्वितीय स्वरूप हैं जहाँ शांति और प्रचंडता का मिलन होता है। उन्हें काठमांडू की आठ महत्वपूर्ण 'अजिमा' (मातृकाओं) में से एक माना जात…
Read moreभारतीय संस्कृति और शाक्त परंपरा में देवी लज्जा गौरी आदिशक्ति का वह अत्यंत प्राचीन, गूढ़ और मौलिक स्वरूप हैं, जो सृष्टि की उर्वरता, मातृत्व और निरंतरता का प्रतीक है। उन्हें 'आदिप्रकृति' का प्रत्यक्ष रूप माना जाता है। जहाँ अन्य देवियों के स्वरूप उनके…
Read moreमहादेव का 'कबंध' स्वरूप: अहंकार के विनाश और विदेह अवस्था का प्रतीक हिंदू धर्म और विशेषकर तांत्रिक परंपराओं में महादेव शिव के अनंत रूप वर्णित हैं। जहाँ एक ओर वे अत्यंत सौम्य 'भोलेनाथ' हैं, वहीं दूसरी ओर वे अत्यंत भीषण और रहस्यमयी 'रुद्र…
Read moreभारतीय पौराणिक ग्रंथों में 'समुद्र मंथन' एक अत्यंत महत्वपूर्ण घटना है। इस मंथन से जहाँ एक ओर कालकूट विष और अमृत निकला, वहीं दूसरी ओर देवी वारुणी का प्राकट्य हुआ। उन्हें 'सुरा' की देवी कहा जाता है, जो दिव्यता, आनंद और चेतना के एक विशिष्ट …
Read moreभारतीय मंदिर वास्तुकला (Temple Architecture) केवल पत्थरों का ढांचा नहीं है, बल्कि यह प्रतीकों और रहस्यों का एक गहरा सागर है। यदि आपने कभी प्राचीन हिंदू मंदिरों के प्रवेश द्वार या शिखर को ध्यान से देखा हो, तो वहां आपको एक अत्यंत उग्र, डरावना और विकराल मुख दि…
Read moreभारतीय तंत्र शास्त्र और प्राचीन पुराणों में यक्ष-यक्षिणियों को कुबेर के खजाने का रक्षक और अलौकिक शक्तियों का स्वामी माना गया है। इन्हीं दिव्य शक्तियों में एक नाम अत्यंत श्रद्धा और विस्मय के साथ लिया जाता है— पद्मविलासिनी मोहिनी यक्षिणी । यह न केवल सौंदर्य क…
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