रहस्यों की दुनिया में आपका स्वागत है।यहाँ आपको ऐसे ऐसे रहष्यो के बारे में जानने को मिलेगा जिसको आप ने कभी सपने में भी नहीं सोचा होगा। रहस्य को जीया जा सकता है, लेकिन जाना नहीं जा सकता। यह हमेशा अज्ञात रहता है। यह हमेशा एक रहस्य बना रहता है।
हिंदू धर्म और विशेष रूप से गुजरात की लोक संस्कृति में मेलडी माता एक अत्यंत प्रभावशाली और जाग्रत देवी मानी जाती हैं। तंत्र शास्त्र और लोक मान्यताओं में उन्हें 'मैल' से जन्मी और 'मैली विद्याओं' का नाश करने वाली देवी के रूप में पूजा जाता है।
माता मेलडी की अनोखी उत्पत्ति कथा
प्राचीन कथाओं के अनुसार, जब अमरूवा नामक दैत्य का अत्याचार बढ़ा, तो उसे हराने के लिए देवताओं ने माँ भगवती, चामुंडा और काली का आह्वान किया। युद्ध के दौरान, वह दैत्य एक मृत गाय के पिंजरे (कंकाल) में जाकर छुप गया। अशुद्ध स्थान होने के कारण देवता वहां प्रवेश नहीं कर पा रहे थे।
तब देवी ने अपने हाथों को रगड़ा और उनके हाथों के 'मेल' (dirt) से एक दिव्य शक्ति प्रकट हुई, जिन्हें मेलडी माता कहा गया। उन्होंने उस अशुद्ध स्थान में घुसकर दैत्य का संहार किया। इसी कारण उनका नाम 'मेलडी' पड़ा।
माता की उत्पत्ति के प्रकार और स्वरूप
मेलडी माता की उत्पत्ति के मुख्य रूप से दो संदर्भ मिलते हैं, जो उनकी शक्तियों को परिभाषित करते हैं:
हाथ के मेल से उत्पत्ति: जैसा कि ऊपर बताया गया, असुरों के विनाश के लिए देवी के तेज और मेल से उनका प्राकट्य हुआ।
मैली विद्या का तरल रूप: कामरूप कामाख्या में जब देवी ने अघोरी जादू-टोना और मैली विद्याओं का अंत किया, तो उन्होंने उन नकारात्मक शक्तियों को समेट कर एक तरल (liquid) रूप दे दिया। इसे नष्ट करने के कारण वे 'मैली विद्या' की स्वामिनी और रक्षक कहलाईं।
सबसे खतरनाक स्वरूप: माता का 'मसान मेलडी' रूप सबसे उग्र और खतरनाक माना जाता है। इनका निवास श्मशान माना जाता है और तामसिक साधनाओं में इनकी पूजा शत्रुओं के नाश और कठिन बाधाओं को दूर करने के लिए की जाती है।
माता का भोग और साधना विधि
मेलडी माता की साधना सात्विक और तामसिक दोनों विधियों से की जाती है।
पसंदीदा भोग: माता को मुख्य रूप से मकई के दाने, लापसी और कुछ मीठा भोग लगाया जाता है। साधना शुरू करने से पहले काले बकरे को गुड़-चना खिलाने की भी परंपरा है।
साधना का समय: मंगलवार या रविवार को प्रातः काल लाल कपड़े पर बाजोट बिछाकर, चावल की ढेरी पर माता की प्रतिमा स्थापित की जाती है। तेल का दीपक और धूप-गूगल का प्रयोग अनिवार्य है।
अवधि: कम से कम 21 दिन की निरंतर साधना से माता की विशेष कृपा प्राप्त होती है, जिससे धन संबंधी समस्याएं दूर होती हैं।
सिद्ध मंत्र
प्रभावशाली मंत्रों का जाप श्रद्धापूर्वक करना चाहिए:
१) ॐ क्लीं मेलडिये नमः
२) मंत्र: > मैय्या मेलडी हाजिर होना चंडी भंगी का काम करना लक्ष्मी रूठी, माया टूटी, बधी बर्बादी तू संभालना गोरख ने किया मच्छन्दर पाया तब मेलडी ने बताया
पूजा के प्रमुख केंद्र
यद्यपि मेलडी माता का कोई एक विशेष सिद्ध पीठ नहीं है, लेकिन उनकी सर्वाधिक मान्यता गुजरात प्रान्त, कामाख्या और उज्जैन में है। ये स्थान तंत्र साधना के लिए विश्व प्रसिद्ध हैं।
निष्कर्ष: मेलडी माता अपने भक्तों के लिए जितनी दयालु हैं, नकारात्मक शक्तियों के लिए उतनी ही कठोर। यदि कोई साधक गुरु से दीक्षा लेकर पूर्ण श्रद्धा के साथ इनकी साधना करता है, तो उसे शीघ्र ही फल की प्राप्ति होती है।
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