सालार जंग संग्रहालय की रहस्यमयी मूर्ति: एक लकड़ी, दो चेहरे और 'मेफिस्टोफिल्स-मार्गरेटा' की अनोखी कहानी

 रहस्यों की दुनिया में आपका स्वागत है।यहाँ  आपको ऐसे ऐसे  रहष्यो के बारे में जानने को मिलेगा जिसको  आप ने  कभी सपने में  भी नहीं सोचा होगा। 

हैदराबाद के प्रसिद्ध सालार जंग संग्रहालय (Salar Jung Museum) में एक ऐसी कलाकृति है जिसे देखने के लिए दुनिया भर से लोग आते हैं। यह है 'मेफिस्टोफिल्स और मार्गरेटा' की दोहरी मूर्ति (Double Statue)। इस मूर्ति की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे देखने के लिए आपको आईने (Mirror) का सहारा लेना पड़ता है।

19वीं सदी का फ्रांसीसी चमत्कार: एक ही लकड़ी में दो जिंदगियां

यह अद्भुत प्रतिमा 19वीं शताब्दी में फ्रांस में बनाई गई थी। इसे गूलर की लकड़ी (Sycamore wood) के एक ही ब्लॉक को तराश कर तैयार किया गया है।

  • सामने का हिस्सा: यहाँ दुष्ट और चतुर राक्षस मेफिस्टोफिल्स की नक्काशी है, जिसके चेहरे पर एक कुटिल मुस्कान है।

  • पिछला हिस्सा: दर्पण में देखने पर आपको एक विनम्र और मासूम लड़की मार्गरेटा (ग्रेचेन) दिखाई देती है, जो प्रार्थना की मुद्रा में सिर झुकाए खड़ी है।


'डॉ. फॉस्ट' की अमर गाथा का जीवंत रूप

यह मूर्ति जर्मन लेखक जोहान वोल्फगैंग वॉन गोएथे के सुप्रसिद्ध नाटक 'डॉ. फॉस्ट' (1808) के पात्रों पर आधारित है। यह कलाकृति अच्छाई और बुराई के बीच के शाश्वत संघर्ष को दर्शाती है।

नाटक की संक्षिप्त कहानी:

  • सौदा: डॉ. फॉस्ट ज्ञान की तलाश में शैतान (मेफिस्टोफिल्स) के साथ अपने खून से समझौता करते हैं।

  • त्रासदी: शैतान के प्रभाव में आकर फॉस्ट मासूम मार्गरेटा को बहकाता है, जिससे उसके जीवन में तबाही मच जाती है।

  • मुक्ति: अंत में, मार्गरेटा को उसके पश्चाताप के कारण स्वर्ग में स्थान मिलता है, जबकि फॉस्ट की आत्मा का फैसला विधाता करता है।


सालार जंग संग्रहालय का मुख्य आकर्षण

हैदराबाद में मुसी नदी के तट पर स्थित इस संग्रहालय में हर साल लाखों पर्यटक आते हैं। मीर तुराब अली खान (सालार जंग प्रथम) ने 1876 में अपनी फ्रांस यात्रा के दौरान इस दुर्लभ प्रतिमा को खरीदा था।

दिलचस्प तथ्य: इस आदमकद मूर्ति में मेफिस्टोफिल्स ने हुड वाला लबादा और ऊँची एड़ी के जूते पहने हैं, जबकि मार्गरेटा के हाथ में एक प्रार्थना पुस्तक है।


एक लकड़ी, दो चेहरे और 'मेफिस्टोफिल्स-मार्गरेटा'

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्नउत्तर
यह प्रसिद्ध मूर्ति किस संग्रहालय में है?सालार जंग संग्रहालय, हैदराबाद (तेलंगाना)।
मूर्तिकार कौन है?इस 19वीं सदी की फ्रांसीसी मूर्ति के कलाकार की पहचान आज भी अज्ञात है।
'वील्ड रेबेका' क्या है?यह सालार जंग संग्रहालय की एक और प्रसिद्ध संगमरमर की मूर्ति है, जिसे जियोवानी मारिया बेंजोनी ने बनाया था।
मूर्ति में किस लकड़ी का उपयोग हुआ है?इसे 'गूलर' (Sycamore) की लकड़ी से बनाया गया है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न: मेफिस्टोफिल्स और मार्गरेटा की मूर्ति कहाँ स्थित है?

उत्तर: यह भारत के तेलंगाना राज्य के हैदराबाद शहर में स्थित सालार जंग संग्रहालय (मुसी नदी के दक्षिणी तट) में प्रदर्शित है।

प्रश्न: इस मूर्ति को देखने के लिए आईने की जरूरत क्यों पड़ती है?

उत्तर: चूँकि यह एक 'Back-to-Back' (दोहरी) मूर्ति है, इसका एक हिस्सा दीवार की तरफ होता है। पीछे की आकृति (मार्गरेटा) को स्पष्ट रूप से देखने के लिए संग्रहालय ने इसके पीछे एक बड़ा दर्पण लगाया है।

प्रश्न: मेफिस्टोफिल्स कौन है?

उत्तर: जर्मन लोककथाओं में मेफिस्टोफिल्स एक शक्तिशाली राक्षस या शैतान का दूत है, जिसके पास रूप बदलने और जादू करने की असीमित शक्तियाँ होती हैं।


निष्कर्ष

सालार जंग संग्रहालय की यह दोहरी मूर्ति केवल कला का नमूना नहीं, बल्कि मानव स्वभाव के दो पहलुओं—अच्छाई और बुराई—का प्रतिबिंब है। यदि आप हैदराबाद जा रहे हैं, तो दार-उल-शिफा स्थित इस ऐतिहासिक संग्रहालय में इस चमत्कार को देखना न भूलें।

डिसक्लेमर

'इस लेख में दी गई जानकारी/सामग्री/गणना की प्रामाणिकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। सूचना के विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/धार्मिक मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संकलित करके यह सूचना आप तक प्रेषित की गई हैं। हमारा उद्देश्य सिर्फ सूचना पहुंचाना है.सिर्फ काल्पनिक कहानी समझ कर ही पढ़े .

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